रावण मारीच सुन मारीच निशाचर भाई
रावन
सुन मारीच निशाचर भाई चल मोरे संग जहाँ रघुराई
होहू कपट मृग तुम छलकारी, मैं हर लाऊं उनकी नारी
मारीच
सुनहु दशानन बात हमारी जिनको कहे तुम नर और नारी
वे जगदीश चराचर स्वामी, राम रमण पितु अंतर्यामी
रावन
सुन मारीच निशाचर भाई चल मोरे संग जहाँ रघुराई
होहू कपट मृग तुम छलकारी, मैं हर लाऊं उनकी नारी
मारीच
सुनहु दशानन बात हमारी जिनको कहे तुम नर और नारी
वे जगदीश चराचर स्वामी, राम रमण पितु अंतर्यामी
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